PM मोदी का G7 Summit 2026 दौरा: भारत की वैश्विक भूमिका हुई और मजबूत
प्रस्तावना
जून 2026 में फ्रांस के एवियन (Évian) में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाओं में से एक रहा। भारत G7 का सदस्य नहीं है, लेकिन पिछले कई वर्षों से विशेष आमंत्रित देश के रूप में लगातार भाग ले रहा है। इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन में हिस्सा लेते हुए वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज़ को मजबूती से उठाया और कई देशों के नेताओं के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें कीं।
G7 Summit 2026 क्या है?
G7 दुनिया की सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। इसमें शामिल देश हैं:
- अमेरिका
- ब्रिटेन
- फ्रांस
- जर्मनी
- इटली
- जापान
- कनाडा
भारत सदस्य नहीं है, लेकिन एक महत्वपूर्ण साझेदार देश के रूप में आमंत्रित किया जाता है।
सम्मेलन के प्रमुख मुद्दे
इस वर्ष G7 सम्मेलन में निम्नलिखित विषयों पर चर्चा हुई:
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)
- जलवायु परिवर्तन
- वैश्विक आर्थिक सुरक्षा
- ऊर्जा आपूर्ति
- यूक्रेन संकट
- पश्चिम एशिया की स्थिति
- वैश्विक व्यापार
- समुद्री सुरक्षा
PM मोदी का संबोधन
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में कहा कि दुनिया को “दाता-प्राप्तकर्ता” मॉडल से आगे बढ़कर समान भागीदारी पर आधारित व्यवस्था अपनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वास (Trust) आज की दुनिया की सबसे बड़ी रणनीतिक पूंजी है।
उन्होंने वैश्विक दक्षिण के देशों की आकांक्षाओं को मंच पर रखते हुए विकासशील देशों की चुनौतियों पर विशेष ध्यान देने की मांग की।
समुद्री सुरक्षा पर भारत की चिंता
प्रधानमंत्री मोदी ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि समुद्री व्यापार वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और नाविकों की सुरक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि समुद्री व्यापार में व्यवधान पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी से मुलाकात
G7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney से मुलाकात की।
बैठक में दोनों देशों ने:
- व्यापार सहयोग बढ़ाने
- ऊर्जा सुरक्षा
- एलएनजी और एलपीजी सहयोग
- शिक्षा और नवाचार
- कौशल विकास
जैसे विषयों पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने भारत-कनाडा संबंधों में सकारात्मक प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।
जर्मनी के चांसलर से मुलाकात
प्रधानमंत्री मोदी ने जर्मनी के चांसलर Friedrich Merz के साथ भी महत्वपूर्ण बैठक की।
दोनों नेताओं ने:
- रक्षा सहयोग
- व्यापार
- तकनीकी साझेदारी
- निवेश
पर चर्चा की। दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर दिया।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री से वार्ता
प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer से मुलाकात की।
उन्होंने कहा कि भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते ने दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग के नए रास्ते खोले हैं।
फ्रांस के राष्ट्रपति का विशेष संदेश
G7 सम्मेलन के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron का हिंदी में भेजा गया संदेश चर्चा का विषय बन गया।
उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को “प्रिय मित्र नरेंद्र” कहकर संबोधित किया, जिससे भारत-फ्रांस संबंधों की मजबूती का संकेत मिला।
अमेरिका के साथ बातचीत
सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के बीच भी बातचीत हुई।
दोनों नेताओं ने वैश्विक सुरक्षा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया।
UAE और मिस्र के नेताओं से मुलाकात
प्रधानमंत्री मोदी ने UAE के राष्ट्रपति और मिस्र के राष्ट्रपति से भी मुलाकात की।
बैठकों में:
- पश्चिम एशिया की स्थिति
- ऊर्जा सहयोग
- निवेश
- क्षेत्रीय शांति
पर चर्चा हुई।
कैंसर के खिलाफ वैश्विक अभियान
G7 सम्मेलन में भारत सहित कई देशों ने कैंसर के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को तेज करने की संयुक्त पहल का समर्थन किया।
इस पहल में:
- अनुसंधान सहयोग
- डेटा साझाकरण
- AI आधारित स्वास्थ्य सेवाएं
- प्रारंभिक जांच
को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
भारत के लिए G7 सम्मेलन का महत्व
G7 में भारत की भागीदारी कई कारणों से महत्वपूर्ण है:
- वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका
- Global South की आवाज़ को मजबूती
- निवेश आकर्षित करने का अवसर
- व्यापारिक संबंधों का विस्तार
- रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना
वैश्विक दक्षिण की आवाज़
प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मेलन में कहा कि विकासशील देशों की चुनौतियों को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में पर्याप्त महत्व मिलना चाहिए।
उन्होंने खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और वित्तीय समावेशन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई।
भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा
विशेषज्ञों का मानना है कि G7 जैसे मंचों पर लगातार भारत की उपस्थिति यह दर्शाती है कि विश्व राजनीति में भारत का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है।
आज भारत:
- दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्था
- तकनीकी शक्ति
- लोकतांत्रिक नेतृत्व
- वैश्विक दक्षिण का प्रतिनिधि
बनकर उभरा है।
निष्कर्ष
G7 Summit 2026 भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि साबित हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन में भारत के हितों के साथ-साथ वैश्विक दक्षिण की चिंताओं को प्रभावी ढंग से उठाया। कनाडा, जर्मनी, ब्रिटेन, अमेरिका और अन्य देशों के नेताओं के साथ हुई बैठकों ने भारत की वैश्विक स्थिति को और मजबूत किया।
आने वाले वर्षों में ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की भूमिका और भी महत्वपूर्ण होने की संभावना है। G7 Summit 2026 ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विश्व व्यवस्था में भारत अब केवल एक सहभागी नहीं बल्कि एक प्रभावशाली नेतृत्वकर्ता के रूप में उभर रहा है।
