BRICS Today News 2026: 14 सितंबर 2026 को BRICS को लेकर सबसे बड़ी खबर भारत में आयोजित 18वें BRICS Summit के सफल समापन की है। नई दिल्ली में आयोजित इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में सदस्य देशों के नेताओं ने वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वास्थ्य, कृषि, ऊर्जा, शांति और वैश्विक शासन व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। 18वां BRICS Summit 13 सितंबर 2026 को समाप्त हुआ और बैठक के बाद New Delhi Declaration को अपनाया गया। यह घोषणा करीब 45 पन्नों की है और इसमें 140 पैराग्राफ शामिल हैं। सम्मेलन का मुख्य विषय था—“Building for Resilience, Innovation, Cooperation, and Sustainability” यानी मजबूती, नवाचार, सहयोग और टिकाऊ विकास के लिए मिलकर काम करना। भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन को वैश्विक दक्षिण यानी Global South की आवाज को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
BRICS Today: आज की सबसे बड़ी खबर क्या है?
आज BRICS से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण खबर यह है कि नई दिल्ली में आयोजित 18वां BRICS Summit समाप्त हो चुका है और सदस्य देशों ने साझा घोषणा जारी की है। सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर सहमति बनी। इनमें वैश्विक व्यापार व्यवस्था में सुधार, विकासशील देशों की भूमिका बढ़ाना, AI के क्षेत्र में सहयोग, स्वास्थ्य क्षेत्र में साझेदारी, कृषि में नई तकनीक, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दे शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन के दौरान BRICS को केवल राजनीतिक मंच के रूप में नहीं बल्कि व्यावहारिक सहयोग का मंच बनाने पर जोर दिया। भारत ने इस दौरान कई देशों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कीं। रिपोर्टों के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS Summit के दौरान लगभग 15 औपचारिक द्विपक्षीय बैठकें कीं और कई नेताओं के साथ अनौपचारिक बातचीत भी हुई।
New Delhi Declaration में क्या खास रहा?
New Delhi Declaration इस साल के BRICS Summit की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है। घोषणा में BRICS देशों ने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका को मजबूत करने पर जोर दिया। संयुक्त राष्ट्र, WTO और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में सुधार की आवश्यकता को भी प्रमुखता दी गई। BRICS देशों ने वैश्विक व्यापार व्यवस्था में अधिक न्यायसंगत प्रतिनिधित्व और विकासशील देशों के हितों को ध्यान में रखने की आवश्यकता बताई। घोषणा में ऊर्जा सुरक्षा, AI, resilient supply chains, cross-border payments और New Development Bank जैसे क्षेत्रों का भी उल्लेख किया गया।
BRICS और AI को लेकर बड़ा फैसला
आज की BRICS खबरों में Artificial Intelligence यानी AI सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक है। BRICS देश AI को भविष्य की अर्थव्यवस्था और उद्योग के लिए महत्वपूर्ण मान रहे हैं। सम्मेलन में AI के जिम्मेदार और समावेशी इस्तेमाल पर चर्चा हुई।चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने BRICS के भीतर AI सहयोग को बढ़ाने के लिए कई प्रस्ताव रखे। इनमें AI open-source zone, digital industry cooperation, smart factories और technical standards जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। AI के क्षेत्र में BRICS का सहयोग आने वाले वर्षों में वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर सकता है। भारत के लिए यह क्षेत्र इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत IT services, software, digital public infrastructure और technology talent के क्षेत्र में एक बड़ी शक्ति है।
BRICS में Global South की आवाज
BRICS Summit का एक बड़ा मुद्दा Global South रहा। Global South में एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और अन्य विकासशील देशों की बड़ी संख्या शामिल है। BRICS लगातार यह संदेश देता रहा है कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में विकासशील देशों को अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। नई दिल्ली घोषणा में संयुक्त राष्ट्र और अन्य बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार की मांग दोहराई गई। भारत के लिए यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और विकासशील देशों की अधिक भागीदारी की मांग करता रहा है।
भारत और चीन के बीच भी महत्वपूर्ण बातचीत
BRICS Summit के दौरान भारत और चीन के संबंध भी चर्चा में रहे।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बैठक हुई। दोनों देशों ने संबंधों को आगे बढ़ाने और सीमा क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। हालांकि भारत-चीन संबंधों में अभी भी कई महत्वपूर्ण मुद्दे मौजूद हैं, लेकिन BRICS के मंच पर दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की बातचीत को कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक विश्लेषण के अनुसार दोनों पक्षों ने व्यापार असंतुलन, बाजार पहुंच, supply chains, connectivity और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे विषयों पर भी चर्चा की।
चीन को मिली BRICS की अगली अध्यक्षता
भारत की 2026 की BRICS अध्यक्षता के बाद 2027 में चीन BRICS की अध्यक्षता करेगा और अगले शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। चीन ने BRICS के अगले चरण को अधिक आर्थिक और तकनीकी सहयोग की दिशा में आगे बढ़ाने के संकेत दिए हैं। शी जिनपिंग ने BRICS के लिए AI, innovation, trade और global governance reform जैसे मुद्दों को महत्वपूर्ण बताया। इससे साफ है कि आने वाले वर्ष में BRICS के एजेंडे में तकनीक और डिजिटल अर्थव्यवस्था का महत्व और बढ़ सकता है।
BRICS में व्यापार को लेकर क्या हुआ?
BRICS के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक आपसी व्यापार को बढ़ाना है। सदस्य देशों के बीच व्यापार बढ़ाने के लिए payment systems, supply chains, market access और logistics को मजबूत करना जरूरी है। नई दिल्ली घोषणा में व्यापार व्यवस्था को अधिक संतुलित और विकासशील देशों के लिए उपयोगी बनाने पर जोर दिया गया। Cross-border payments पर भी सहयोग बढ़ाने की बात हुई। इसका उद्देश्य अलग-अलग देशों के बीच व्यापार को आसान और अधिक प्रभावी बनाना है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि BRICS ने तुरंत कोई नई साझा मुद्रा शुरू कर दी है। ऐसी खबरों और सोशल मीडिया दावों को आधिकारिक घोषणाओं से अलग समझना जरूरी है।
क्या BRICS की अपनी करेंसी लॉन्च हो गई?
BRICS से जुड़ी खबरों में अक्सर “BRICS Currency” को लेकर चर्चा होती है। लेकिन वर्तमान Summit के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि BRICS ने कोई नई साझा मुद्रा लॉन्च कर दी है। BRICS देशों का ध्यान फिलहाल cross-border payments और वित्तीय सहयोग को बेहतर बनाने पर अधिक दिखाई देता है। इसलिए सोशल मीडिया पर चलने वाली “आज से BRICS currency शुरू” जैसी खबरों को बिना आधिकारिक पुष्टि के सच नहीं मानना चाहिए।
New Development Bank की भूमिका
BRICS का New Development Bank भी महत्वपूर्ण संस्था है। इस बैंक का उद्देश्य सदस्य देशों और अन्य विकासशील देशों में infrastructure और sustainable development projects को वित्तीय सहयोग देना है। BRICS के विस्तार के साथ बैंक की भूमिका भी बढ़ सकती है। विकासशील देशों के लिए infrastructure, clean energy, transportation और अन्य विकास परियोजनाओं में वित्तीय सहयोग भविष्य में BRICS के आर्थिक प्रभाव को बढ़ा सकता है।
कृषि क्षेत्र में चार नई पहल
BRICS Summit में कृषि क्षेत्र को भी महत्वपूर्ण स्थान मिला। भारत की अध्यक्षता में कृषि क्षेत्र में climate resilience और productivity को बढ़ाने के लिए चार नई पहल सामने आईं। इनमें agroecology, regenerative agriculture और digital agriculture जैसे क्षेत्र शामिल हैं। जलवायु परिवर्तन और बदलते मौसम के बीच कृषि उत्पादन को बनाए रखना दुनिया के सामने बड़ी चुनौती है। ऐसे में BRICS देशों के बीच कृषि तकनीक और ज्ञान का आदान-प्रदान महत्वपूर्ण हो सकता है। भारत जैसे बड़े कृषि प्रधान देश के लिए यह सहयोग विशेष महत्व रखता है।
Seafarers Emergency Support Network
भारत की ओर से BRICS के सामने Seafarers’ Emergency Support Network का प्रस्ताव भी रखा गया। इसका उद्देश्य समुद्री कर्मचारियों यानी seafarers की सुरक्षा और आपातकालीन सहायता को बेहतर बनाना है। भारत का समुद्री क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान है और भारतीय seafarers दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में काम करते हैं। इसलिए इस प्रकार का नेटवर्क भारत के लिए विशेष महत्व रखता है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में BRICS सहयोग
BRICS देशों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग को भी महत्वपूर्ण माना। महामारी के अनुभव के बाद global health preparedness पर दुनिया का ध्यान बढ़ा है। BRICS के भीतर medicines, healthcare technology, research और pandemic preparedness के क्षेत्रों में सहयोग भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। भारत के पास pharmaceutical manufacturing और affordable medicines के क्षेत्र में मजबूत क्षमता है। इससे BRICS देशों के बीच स्वास्थ्य सहयोग को बढ़ावा मिल सकता है।
BRICS और ऊर्जा सुरक्षा
ऊर्जा सुरक्षा भी BRICS के एजेंडे में महत्वपूर्ण विषय रहा। BRICS देशों में दुनिया के बड़े energy producers और consumers शामिल हैं। इसलिए ऊर्जा बाजार में इन देशों की भूमिका काफी बड़ी है। तेल, गैस, renewable energy और energy transition जैसे मुद्दों पर सहयोग से सदस्य देशों को लाभ हो सकता है। साथ ही clean energy और sustainable development पर भी ध्यान देना आवश्यक है।
Critical Minerals पर ध्यान
आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था में critical minerals का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। Electric vehicles, batteries, semiconductors, renewable energy और advanced technology के लिए कई महत्वपूर्ण minerals की आवश्यकता होती है। BRICS देशों के बीच critical minerals के क्षेत्र में सहयोग supply chains को मजबूत कर सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS Summit के दौरान technology और critical minerals के weaponisation को लेकर भी चिंता व्यक्त की।
भारत की कूटनीतिक भूमिका
2026 में BRICS की अध्यक्षता भारत के पास थी। नई दिल्ली Summit भारत की विदेश नीति और Global South diplomacy के लिए महत्वपूर्ण आयोजन रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन बैठकों में व्यापार, defence, energy, connectivity, technology और regional issues जैसे विषयों पर चर्चा हुई। कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव के साथ मोदी की बैठक में political relations, trade, defence and security, connectivity, energy, critical minerals और emerging technologies जैसे विषयों पर बातचीत हुई। नाइजीरिया के उपराष्ट्रपति के साथ भी BRICS Summit के दौरान बैठक हुई।
भारत और अफ्रीका के संबंध
BRICS में अफ्रीकी देशों की भूमिका बढ़ रही है। दक्षिण अफ्रीका BRICS का पुराना सदस्य है और मिस्र जैसे नए सदस्य भी समूह में शामिल हैं। भारत ने BRICS के माध्यम से अफ्रीकी देशों के साथ व्यापार, development cooperation और technology partnership को आगे बढ़ाने पर जोर दिया है। यह भारत की Global South diplomacy का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।
ईरान और UAE को लेकर BRICS Summit में क्या हुआ?
BRICS Summit के दौरान पश्चिम एशिया की स्थिति भी चर्चा में रही। भारत के राजनयिक प्रयासों और कई देशों के बीच बातचीत से ईरान और UAE के बीच एक महत्वपूर्ण consensus बनाने में मदद मिली। Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार लगभग 100 घंटे की intensive negotiations ने इसमें भूमिका निभाई और चीन, रूस, मिस्र तथा ब्राजील की भी भूमिका रही। यह घटनाक्रम BRICS को केवल आर्थिक मंच से आगे एक diplomatic platform के रूप में देखने की चर्चा को भी बढ़ाता है। हालांकि ऐसे कूटनीतिक समझौतों के वास्तविक प्रभाव का आकलन समय के साथ ही किया जा सकेगा।
BRICS का भविष्य क्या है?
BRICS का भविष्य मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों पर निर्भर करेगा। पहला—क्या सदस्य देश अपनी घोषणाओं को वास्तविक projects में बदल पाते हैं। दूसरा—क्या अलग-अलग राजनीतिक और आर्थिक हितों के बावजूद सदस्य देश common ground बनाए रख सकते हैं। तीसरा—क्या BRICS trade, finance, technology और development के क्षेत्र में वास्तविक और measurable results दे सकता है।BRICS में अलग-अलग देशों के आर्थिक मॉडल और विदेश नीति प्राथमिकताएं अलग हैं। इसलिए consensus बनाना हमेशा आसान नहीं होगा। फिर भी इतने बड़े समूह का एक साथ आना वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है।
क्या BRICS अमेरिका और पश्चिम के खिलाफ संगठन है?
BRICS को केवल “पश्चिम विरोधी संगठन” के रूप में देखना सही नहीं होगा। सदस्य देशों की अपनी-अपनी विदेश नीति और आर्थिक प्राथमिकताएं हैं। BRICS का आधिकारिक एजेंडा economic cooperation, development, multilateralism और global governance reform जैसे विषयों पर केंद्रित है। हालांकि कुछ मुद्दों पर BRICS देशों की नीतियां अमेरिका और पश्चिमी देशों से अलग हो सकती हैं, लेकिन समूह के भीतर भी सभी मुद्दों पर एक जैसी राय नहीं होती। इसलिए BRICS को एक सहयोगी बहुपक्षीय मंच के रूप में समझना ज्यादा उचित है।
आज BRICS News का असर भारत पर क्या हो सकता है?
BRICS Summit का भारत पर प्रभाव कई क्षेत्रों में दिखाई दे सकता है।
1. व्यापार
नए व्यापारिक अवसर खुल सकते 2. निवेश
BRICS देशों के बीच investment cooperation बढ़ सकता है।
3. Technology
AI, digital infrastructure और emerging technologies में partnership बढ़ सकती है।
4. Agriculture
Digital agriculture और climate-resilient farming को बढ़ावा मिल सकता है।
5. Energy
Energy security और renewable energy cooperation मजबूत हो सकता है।
6. Global diplomacy
Global South में भारत की भूमिका और मजबूत हो सकती है।
BRICS Today Update: आम लोगों के लिए क्या मतलब?
BRICS Summit आम लोगों से सीधे जुड़ा हुआ लग सकता है, लेकिन इसके फैसलों का असर लंबे समय में व्यापार, technology, employment, investment और energy prices जैसे क्षेत्रों पर पड़ सकता है। अगर BRICS देशों के बीच trade और investment बढ़ता है तो भारतीय कंपनियों को नए बाजार मिल सकते हैं। Technology cooperation बढ़ने पर startups और IT companies को भी अवसर मिल सकते हैं। Agriculture cooperation से किसानों के लिए नई तकनीक और बेहतर farming practices का रास्ता खुल सकता है। हालांकि किसी भी Summit के फैसलों का तत्काल असर बाजार या आम जनता पर पड़ना जरूरी नहीं है। घोषणाओं को वास्तविक policies और projects में बदलने में समय लगता है।
BRICS Summit 2026 की 10 बड़ी बातें
- 18वां BRICS Summit नई दिल्ली में आयोजित हुआ।
- Summit 13 सितंबर 2026 को समाप्त हुआ।
- New Delhi Declaration अपनाया गया।
- Global South की भूमिका मजबूत करने पर जोर दिया गया।
- AI cooperation को महत्व दिया गया।
- Trade और financial cooperation पर चर्चा हुई।
- Cross-border payments को बेहतर बनाने की दिशा में सहयोग पर जोर दिया गया।
- Agriculture में नई पहलों की घोषणा हुई।
- Seafarers Emergency Support Network का प्रस्ताव सामने आया।
- 2027 में चीन BRICS की अध्यक्षता करेगा।
निष्कर्ष
BRICS Today News 2026 में सबसे महत्वपूर्ण खबर नई दिल्ली में हुए 18वें BRICS Summit का सफल समापन है। भारत की अध्यक्षता में हुए इस सम्मेलन में सदस्य देशों ने New Delhi Declaration को अपनाया और व्यापार, AI, स्वास्थ्य, कृषि, ऊर्जा, global governance और development cooperation जैसे कई क्षेत्रों में आगे बढ़ने का रोडमैप प्रस्तुत किया। भारत के लिए यह Summit कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बातचीत की और Global South की भूमिका को मजबूत करने पर जोर दिया। अब असली चुनौती इन घोषणाओं को जमीन पर लागू करना है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि BRICS के AI, trade, payments, agriculture और development से जुड़े प्रस्ताव किस तरह वास्तविक projects और agreements में बदलते हैं।
2027 में चीन BRICS की अध्यक्षता करेगा। इसलिए आने वाला वर्ष BRICS के लिए एक नए चरण की शुरुआत होगा। भारत द्वारा 2026 में तय किए गए priorities और चीन द्वारा 2027 में प्रस्तावित initiatives मिलकर समूह की आगे की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।
नोट: BRICS से जुड़ी खबरों में सोशल मीडिया पर कई अपुष्ट दावे तेजी से फैलते हैं। इस लेख में उपलब्ध ताजा रिपोर्टों और Summit से संबंधित प्रकाशित जानकारी के आधार पर तथ्य प्रस्तुत किए गए हैं। भविष्य में आधिकारिक घोषणाओं के आधार पर जानकारी बदल सकती है।






